Skip to main content

डोनाल्ड ट्रम्प का बेबाक आचरण - 'टैरिफ' और 'युद्ध.'

    

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जब विश्व के कई देशों के उत्पादों व सेवाओं पर आयात शुल्क बढ़ाया, तो उन देशों में उनका बड़े पैमाने पर विरोध किया जाने लगा. मेरे समझ से टैरिफ को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का विरोध बिल्कुल गलत था और है भी.

आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति अपने देश के संरक्षक हैं, और उन्हें अपने देश के हितों से सम्बंधित किसी भी निर्णय की स्वतंत्रता है; विशेषकर व्यापार के मामले में यदि वे इस प्रकार के निर्णय लेते हैं, तो वह उनका अधिकार है और किसी को उनसे कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. टैरिफ में बदलाव मात्र तभी गलत माना जा सकता है, जब किसी ऐसी डील की टैरिफ में एकतरफा बदलाव किया जाए जो सरकारी स्तर पर पहले से की जा चुकी हो.

टैरिफ को लेकर उनके तर्क पूरी तरह से जायज हैं. उन्होंने कहा है कि जिन देशों से उन्हें व्यापारिक घाटा है, उन्हें उन देशों के साथ उस व्यापारिक घाटे को बराबर करना है. यह पूर्णतया एक आर्थिक निर्णय है और सर्वथा उचित भी है. अमेरिका पर कर्ज बोझ अधिक है और अपने कर्ज के बोझ को कम करने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प ने टैरिफ का इस्तेमाल किया जो एकदम जायज है.

जो लोग अथवा राष्ट्र, ट्रंप के टैरिफ को आपने ऊपर एक अनावश्यक और जबरदस्ती का किया गया प्रहार मानते हैं, असल में यह उनकी व्यक्तिगत समस्या है.

आखिर जब अमेरिका आपके उत्पाद नहीं चाहता या उससे अधिक टैक्स की मांग करता है, तो आपको चाहिए कि या तो आप अपने उत्पाद व सेवाओं में मूल्य घटाएं, जिसमें या तो आपको अपने मुनाफे से समझौता करना पड़े या फिर व्यापार बंद करना पड़े अथवा आप अमेरिका के बजाय अन्य देशों से व्यापार करें; यह उन देशों व उनके व्यापारियों की समस्या है जहाँ के उत्पाद अमेरिका में बेचे जाते हैं, न कि अमेरिका की. अमेरिका की कोई जिम्मेदारी नहीं है कि वह ऐसे देशों के व्यपारिक हितों के लिए अपना स्वयं का आर्थिक नुकसान करे.

कोई भी व्यक्ति डील थोपने, या फिर अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लायक तभी होता है, जब वह इतना सक्षम हो, कि सामने वाला उसकी डील को ठुकरा न सके. जो सक्षम होता है, वही किसी भी डील को अपने पक्ष में कर सकता है. नहीं तो किसी सक्षम के सामने गिडगिडाने और हाथ फैलाकर डील मांगने के अलावा कोई चारा नहीं रहता. फिर यह पूर्णतया सामने वाले के ऊपर निर्भर करता है कि वह आपपर कृपा बनाता है या नहीं. जो भी व्यक्ति अथवा देश अपने को सक्षम बनाता है, उसकी ओर सभी देखते हैं, अथवा देखने को विवश होते हैं.

वर्तमान में दुनिया के कई देश आर्थिक व सैन्य सहायता के लिए अमेरिका की ओर देखते हैं. आखिर वे अपने को स्वयं के प्रयासों से इतना काबिल क्यों नहीं बनाने का प्रयास करते, कि अमेरिका भी उनके महत्व को समझने के लिए बाध्य हो जाए, और वह स्वयं उनके साथ बराबरी का तालमेल बैठाकर आगे बढ़े.

अमेरिका ने चीन पर भी टैरिफ बढ़ाने की बात कही थी. परन्तु चीन के ऊपर टैरिफ का कोई प्रभाव नहीं पड़ा. जिसका मात्र एक ही कारण है, कि चीन ने लगातार अपने को लगभग सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने का लगातार प्रयत्न किया, और उसने उसमें उत्कृष्टता भी हासिल की है. चीन ने अपनी विकास यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए यथासंभव उन सभी देशों की टेक्नोलॉजी हासिल करने का प्रयास किया, जो उसे चाहिए थी; और उसने बड़ी तीव्र गति से अपने आपको विकास के उस स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया, कि दुनिया के लगभग अधिकांश देश उससे व्यापारिक रूप से लाभान्वित हो रहे हैं और चीन के उत्पाद व सेवाओं को स्वयं ही अपनाने को बाध्य हैं.

एक और अपने को सक्षम बनाने के लिए सिंगापुर, रूस, जापान और चीन जैसा समर्पण पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है वहीं दूसरी ओर यूरोप, इजराइल, अमेरिका और रूस जैसे देश चहुंमुखी विकास हेतु खोज, आविष्कार व नवाचार के क्षेत्र में पूरे विश्व के अगुआ हैं जिन्होंने दुनिया को एकदम से बदल कर रख दिया है.

सिंगापुर और चीन ने यूरोप, अमेरिका, रूस और कुछ हद तक जापान में विकसित की गई तकनीकी को अपनाकर उनका बेहतर उपयोग भी किया, साथ ही हासिल की हुई तकनीकी में नवाचार करके अपने को आर्थिक रूप से इतना सक्षम बनाया है कि इन देशों के साथ ही पूरी दुनिया भी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से इनसे लाभान्वित भी हो रही है.

इजराइल, अमेरिका और इरान युद्ध के समय जब विश्व के कई देश ऊर्जा संकट से दो – चार हैं, तब चीन, सिंगापुर और रूस जैसे देशों पर इसका कोई ख़ास प्रभाव नहीं पड़ रहा है. रूस तो नाटो देशों के षड्यंत्र से कई मोर्चों पर पहले से ही घिरा हुआ है, फिर भी वह ऊर्जा जरूरतों के लिए परेशान नहीं है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सत्ता सम्हालने के उपरान्त कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, जो पूरी तरह से उनके अपने देश अमेरिका के हितों के खातिर ही हैं.

राष्ट्रपति बनने के बाद से उन्होंने रूसी राष्ट्रपति 'पुतिन' से संबंधों को बेहतर करने का प्रयास किया और उन्होंने यह पहले से ही भांप लिया था कि युक्रेन के कंधे पर बन्दूक रखकर यूरोपीय देश, रूस को नुकसान पहुंचाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं.

एक ओर यूरोप के अधिकांश देश जबरन अमेरिका के संसाधनों को अनावश्यक रूप से युक्रेन युद्ध में बर्बाद करवा रहे हैं, और दूसरे जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यूरोपीय देशों से ईरान युद्ध में होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग खुलवाने के लिए सहयोग मांगते हैं, तो अधिकांश नाटो देश उनकी बात को तवज्जो नहीं देते.

एक ओर यूरोपीय देश चाहते हैं कि नाटो देशों की रक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका सम्हाले, लेकिन जब अमेरिका को उनकी आवश्यकता होती है तो वे अमेरिका से किनारा कर लेते हैं. अधिकांश यूरोपीय देशों का एक ही उद्देश्य है कि वे अमेरिकी संसाधनों से मौज करें. लेकिन चूंकि डोनाल्ड ट्रम्प एक सफल व्यवसायी भी हैं, तो स्वाभाविक रूप से वे अपने देश की संपत्ति को बर्बाद होने से बचाने का प्रयास भी करते हैं. यही कारण था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी फंड से चलने वाले कई संगठनों से अमेरिका को बाहर कर लिया और अब उन्होंने नाटो से बाहर होने के भी संकेत दिए हैं, ये अलग की बात है कि इसमें मुद्दे में  दम नहीं दिखता.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कार्यशैली दूसरों से भिन्न है. वे अपने आपको हर देश के राष्ट्राध्यक्षों के सामने आदर्श आचरण करने का दिखावा करने का नाटक नहीं करते. उनके मन में जो चल रहा होता है वे उसे बोल भी देते हैं और कई बार आवेश में कर या फिर भावनाओं में बहकर भी वे अनावश्यक बयानबाजी भी कर देते हैं जो उनका व्यक्तिगत स्वाभाव है.

यदि ‘शांति के नोबेल’ को लेकर उनके आचरण को छोड़ दिया जाए, तो उन्होंने अधिकतर कार्य बहुत अच्छे किए हैं, जिसमें बाहरी लोगों को अमेरिका से बाहर करना भी एक प्रसंसनीय कदम है. 
वे नहीं चाहते कि उनके देश के संसाधनों पर बाहरी लोगों का कब्ज़ा हो, और प्रत्येक जिम्मेदार राष्ट्राध्यक्ष का यह कर्तव्य भी है कि वह अपने देश के संसाधनों का उपयोग अपने नागरिकों की बेहतरी के लिए प्राथमिकता से करे.

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का विरोध मात्र राजनीतिक कारणों से वैसा ही हो रहा है, जैसा कि भारत में CAA, NRC, और कथित किसान आन्दोलन सरकार विरोधी तत्वों द्वारा प्रायोजित था. यहाँ भी यह दिखाने का प्रयास किया गया था कि भारत के अधिकांश लोग केंद्र की मोदी सरकार से नाराज हैं. जबकि वास्तविकता उसके ठीक उलट थी. ठीक वही स्थिति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विरुद्ध किये जा रहे विरोध प्रदर्शनों की भी है, जिसका संचालन ऐसे लोगों द्वारा किया जा रहा है जो 'डोनाल्ड ट्रंप' के धुर विरोधी हैं और डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर उनका वश नहीं चल पा रहा है. दुनिया के ऐसी प्रभावशाली व कुटिल लोग जो डोनाल्ड ट्रंप को अपनी उँगलियों पर नचाना चाहते हैं, मात्र उन्ही का यह प्रोपोगंडा व एजेंडा है, कि डोनाल्ड ट्रंप के विरुद्ध अभियान चलाकर उनकी छवि खराब की जाए.  जबकि सच तो यह है कि डोनाल्ड ट्रंप जो भी कर रहे हैं वह उनके अपने राष्ट्र हित से प्रेरित ही है.

विभिन्न देशों पर टैरिफ लगाने के दौरान उन्होंने एक बार कहा था कि “भारत के लोग आज उनसे प्यार नहीं करते, लेकिन वे जल्द ही उनसे प्यार करने लगेंगे.” उनका यह वक्तव्य बड़ा सोचा समझा वक्तव्य था. 
भारत में उनका विरोध उस समय इसलिए अधिक था, क्योंकि उस समय पाकिस्तान जैसे आतंकी देश को वे अधिक तवज्जो दे रहे थे. परन्तु शायद यह उनकी रणनीति का एक हिस्सा ही था. अमेरिका को जब भी पाकिस्तान को चोट पहुँचानी होती है, तो वह उसे कोई ऐसा लालच देता है जिससे वह उनके जाल में फंस जाए. और जब वे पकिस्तान का एक टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल कर लेता है, तो फिर वह उसे कमोड का रास्ता दिखा देता है.

कुल मिलाकर ट्रंप जो भी काम कर रहे हैं वह न केवल उनके अपने देश अमेरिका के लिए बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए बेहतर ही है. 

#donaldtrump #usapresident #iranwar #isrealwar #europeandusa #StraitofHormuz #aajtak #abpnews #indianews #news #latestnews #newyorktimes #putin #cnn #bharatsamachar #yogiadityanath #modi #narendramodi #Putin #trump #maga

Comments

Popular posts from this blog

"डोनाल्ड ट्रंप" की हत्या का प्रयास।। कोई साजिश या संयोग ?

नवम्बर – दिसम्बर 2023 में, अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों ने “निखिल गुप्ता” नाम के एक भारतीय नागरिक को इस आरोप में गिरफ्तार कर लिया, कि वह कनाडा में रह रहे खालिस्तानी अलगाववादी नेता `पन्नू’ की ह्त्या की शाजिश रच रहा है. वह भारतीय नागरिक, न तो उनके देश अमेरिका में था, और न ही उस व्यक्ति से अमेरिका के किसी भी नागरिक को खतरा था; फिर भी उसे `पन्नू’ जैसे अलगाववादी व्यक्ति की हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. `पन्नू’ की कथित रूप से हत्या की साजिश रचने वाला भारतीय नागरिक एवं `पन्नू’ दोनों उनके देश के बाहर थे और दोनों उनके नागरिक भी नहीं हैं.                                                      अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति `डोनाल्ड ट्रंप’ के ऊपर हुए जानलेवा हमले के प्रकरण में , अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का जैसा आचरण दिखाई दिया, उससे तो ऐसा ही प्रतीत होता है, कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को अन्य देशों से जुडी बहुत सारी साजिशों की जानकारी करने में त...

अयोध्या में राम मंदिर बनने से क्या लाभ ?

                                    श्री राम मंदिर   अयोध्या के विकास होने से वाकई में क्या लाभ होगा, इसे समझने के लिए इस लेख के अंत में कुछ चित्रों को देखिये जिससे आपको पता चलेगा कि धार्मिक टूरिज्म बढ़ने से उस क्षेत्र अथवा शहर में कितने बड़े बदलाव होते हैं ।   लेकिन सबसे पहले हम बात करते हैं अयोध्या में बन रहे श्री राम जन्मभूमि मंदिर के विषय में; कि अयोध्या में श्री राम मंदिर के निर्माण से ऐसे कौन से बड़े बदलाव अयोध्या एवं उसके आसपास के जनपदों में दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें उस क्षेत्र का हर व्यक्ति देख और महसूस कर रहा है । 1. जमीनों के मूल्य आसमान छू रहे हैं : आज अयोध्या की स्थिति ऐसी हो गई है कि वहां के जमीनों के दाम उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के जमीनों के दामों से भी अधिक हो गए हैं ।  आज अयोध्या में भारत के लगभग होटल चेन, अपने – अपने होटलों के निर्माण कार्यों में लगे हुए हैं या फिर वे वहां अपने होटल बनाने के लिए प्लान कर रहे हैं ।  हाल ही में टाटा ग्रुप ने अपने तीसर...

"ठेले वाली गिलहरी"। "राम काज" में सहयोग का मनोभाव।।

     अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के उपलक्ष्य में, मैंने भी अपनी कॉलोनी में एक सूक्ष्म पूजन कार्यक्रम करने का मन बनाया ।  मेरे साथ, मेरी ही कॉलोनी के सज्जन व्यक्ति भी पूरे उत्साह से सम्मिलित हुए । तय कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर, हम दोनों अगले दिन के कार्यक्रम हेतु प्रसाद की व्यवस्था करने के लिए, बाजार से जरूरी सामान खरीदने गए ।  जब मैं केले खरीदने को एक ठेले वाले दुकानदार के पास गया और उससे बड़ी संख्या में केले मांगे, तो वह समझ गया कि मैं अगले दिन के कार्यक्रम के लिए प्रसाद हेतु इतने अधिक केले मांग रहा हूँ । सारे केले देने के बाद, उसनें "पांच केले" मुझे अलग से दिए, और बोला कि भगवान श्री राम के कार्य हेतु मेरा भी एक छोटा सहयोग ले लीजिये । मैंने उसे ऐसा करने से मना किया और कहा  – तुम अपना नुकसान क्यूँ कर रहे हो ? इसकी कोई आवश्यकता नहीं है । लेकिन वह विनय भाव से मुझसे बोला – “मुझे मना मत करिए साहब, भगवान राम के कार्य के लिए मेरी ओर से भी, मेरा यह छोटा सा सहयोग ले लीजिये, मैं भी उनकी पूजा में भागीदार बनना चाहता हूँ।" मैं चाह कर भ...

पैसों के निवेश हेतु कुछ महत्वपूर्ण सुझाव

भारतीय समाज में आज भी अधिकतर लोगों में धन के निवेश को लेकर अपेक्षित ज्ञान व समझ की कमी है. जिन लोगों के पास धन के नियमित स्रोत हैं, अथवा जिनके पास कहीं से एक मुस्त धन प्राप्त होता है (जैसे रिटायरमेंट के बाद मिला हुआ धन/पैतृक संपत्ति अथवा इन्सुरेंस इत्यादि से प्राप्त हुआ धन) वे अपने धन को सुरक्षित रखते हुए उससे बेहतर लाभ प्राप्त करने हेतु उचित स्थान पर निवेश के मार्ग तलाशते हैं. इस तलाश में उनके सबसे बढे सलाहकार उनके अपने कुछ करीबियों साथी / रिश्तेदार ही होते हैं, और वे उन्हीं की सलाह के अनुसार अपने धन का निवेश करते हैं. बहुत से लोगों के कुछ रिश्तेदार, अथवा करीबी ऐसे भी होते हैं, जो कुछ बीमा कंपनियों में कमीशन एजेंट के रूप में काम कर रहे होते हैं; ऐसे कमीशन एजेंट हमेशा ऐसे ही लोगों की तलाश में रहते हैं, जिनके पास धन के कोई नए स्रोत बने हों अथवा जिन्हें कहीं से बड़ा धन अचानक प्राप्त हुआ हो. उदाहरण के तौर पर - जिसकी नई नौकरी लगी हो, किसी बीमा का पैसा मिला हो, रिटायरमेंट के उपरान्त फंड इत्यादि का पैसा मिला हो अथवा पैतृक संपत्ति से बड़ा धन प्राप्त हुआ हो इत्यादि. ये कमीशन एजेंट्स, ऐसे लोगों...

"पाकिस्तान और मोहम्मद गोरी" के कृत्यों में समानता। भारत को सुअवसर खोना नहीं चाहिये

............भारत विभाजन के बाद से ही हम पाकिस्तान के लगभग हर वार का मात्र तात्कालिक जवाब देकर उसे हर बार छोड़ दिया करते हैं; लेकिन वह अपनी हरकतों पर विराम लगाने को तैयार नहीं है. यह वैसा ही है जैसा मोहम्मद गोरी लगातार पृथ्वीराज चौहान पर हमले करता रहता था, और हर बार पृथ्वीराज चौहान उसे भाग जाने देते थे. परन्तु इसका अंत में क्या परिणाम हुआ यह सभी को पता है.  यदि पृथ्वीराज चौहान, मोहम्मद गोरी के दूसरे हमले पर ही उसका अंत कर दिए होते तो भारत का इतिहास कुछ और ही होता. इसलिए यदि पाकिस्तान को अभी नहीं रोक दिया गया तो भविष्य में भारत को भी पृथ्वीराज जैसा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है; क्योंकि पाकिस्तान मो0 गोरी की भांति भारत पर निरंतर हमले जारी रख रहा है ......

फारुख अब्दुल्ला द्वारा 'मानवता' शब्द का अपनी सुविधानुसार प्रयोग

".....‘फारुख अब्दुल्ला’ ने काश अपने पाकिस्तानी साथियों को तब भी ‘मानवता के धर्म’ के पालन की सलाह दी होती, जब पाकिस्तानी सरकार अपने देश में पिछले कई दशकों से बसे हुए ‘अफगानों’ को वापस उनके मूल देश अफगानिस्तान भेज रही थी ...."

हिट एंड रन कानून और ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल

हाल ही में, केंद्र सरकार ने “हिट एंड रन” कानून के तहत होने वाली सजा में कुछ परिवर्तन करके, एक नया संशोधित कानून प्रस्तुत किया है. परन्तु इस लेख के लिखे जाने तक (दिनांक 02-01-2023) यह कानून लागू नहीं किया गया है. फिर भी इस नए कानून में दिए गए प्रावधानों के विरोध में, भारत के कई हिस्सों के ट्रक चालकों ने हड़ताल शुरू कर दी है.                                                    इस संशोधित कानून के तहत, यदि कोई वाहन चालक लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए, अपनी गाड़ी द्वारा किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाता है और उसके बाद वह वाहन चालक, पुलिस अथवा सम्बंधित अधिकारियों/संस्थानों को सूचित किये बगैर फरार हो जाता है, तो अब उसे “दस वर्ष तक का कारावास” एवं “7” लाख रूपये तक का जुर्माना” भरना पड़ सकता है. पूर्व के कानून में इस प्रकार की घटना के बाद अधिकतम “दो वर्षो” के कारावास का प्रावधान था. इस मुद्दे पर यह समझना आवश्यक है कि इस प्रकार की किसी दुर्घटना होने पर वाहन चालक, घटना वाली ...

महबूबा मुफ़्ती का 'हमास' प्रेम

                                                    “महबूबा मुफ़्ती” ने ‘अमेरिका’ के ‘लास एन्जलेस’ में, जंगल की आग से हो रहे बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान के बहाने, गाजा का मुद्दा उठाया है. “महबूबा मुफ़्ती” के मुताबिक़ ‘गाजा’ में, ‘इजराइल’ की ओर से की जा रही सैन्य कार्यवाही से हो रहे जान माल के नुकसान के पीछे ‘इजराइल’ दोषी है. खैर “महबूबा मुफ़्ती” जैसे लोगों से इसी प्रकार के बयानों की अपेक्षा है. वे भारत के अधिकतर लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में कभी कोई चूक नहीं करती हैं. उनके ईमानदारी की दाद देनी पड़ेगी, कि वे कभी भी लोगों के बीच भ्रम उत्पन्न करने की कोई गलती नहीं करतीं; जिससे कि लोग किसी क्षण यह महसूस करने लग जायें कि “महबूबा मुफ़्ती” में कोई आत्म परिवर्तन होने लगा है.   “महबूबा” ने कभी भी ‘हमास’ को यह सुझाव देने की जहमत नहीं उठाई, कि वह ‘इजराइल’ के ‘बंधक नागरिकों’ को अपने चंगुल से छोड़ दे; जिससे इजराइल द्वारा की जाने वाली सैन्य कार्यवाही को रोकने का को...

वर्ष 2024 के अमेरिकी चुनाव की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के सन्देश

        कुछ समय पूर्व ही अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव संपन्न हुए. जो लोग इस चुनाव के परिणामों एवं चुनाव के दौरान होने वाली विभिन्न घटनाओं को लेकर जिज्ञासु थे, उनके लिए यह चुनाव बड़ा दिलचस्प रहा. जिन्हें इस बार के चुनाव में दिलचस्पी रही, उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के दौरान हुई विभिन्न घटनाओं का अपने – अपने नजरिये से विश्लेषण किया और उसी के अनुरूप निष्कर्ष भी निकाले.   इस चुनाव के अंतिम परिणाम के प्रति मेरे अंदर भी बड़ा उत्साह था. बहुत से लोगों की भाँति मैं यही चाहता था, कि अमेरिका के अगले राष्ट्रपति "डोनाल्ड" ट्रंप ही बनें. और अंततः वे ही अमेरिका के नए राष्ट्रपति के रूप में चुने गए. इस चुनाव के दौरान घटित कुछ घटनाओं ने मुझे बड़ा प्रभावित किया. उनमें से जिन घटनाओं ने मुझे प्रभावित किया, उनमें से प्रमुख घटनाओं का मैं यहाँ उनका जिक्र कर रहा हूँ. कुछ वर्षों पूर्व तक, मैं इस पूर्वाग्रह से ग्रसित था कि “हमारे भारतीय नेताओं एवं यहाँ के सामान्य जन मानस” का चुनावी दृष्टिकोण बड़ा ही सीमित होता है, जबकि विकसित देशों के लोग बड़ा विशाल और उदार दृष्टिकोण रखते हैं. वे अपने ...

"ऑपरेशन सिन्दूर" की सफलता हेतु मोदी जी और भारत की सुरक्षा में लगे हुए सभी राष्ट्रभक्तों को धन्यवाद

...आज की सैन्य कार्यवाही से भारत ने पाकिस्तान की रक्षा मजबूती का आकलन तो कर ही लिया, परन्तु भारत को इतिहास से सबक लेते हुए यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे शत्रु को बार – बार हरा कर छोड़ देना उचित नहीं होगा; जैसा कि पृथ्वी राज चौहान ने मोहम्मद गोरी के साथ किया था. इसकारण पाकिस्तान को इस हालत में पहुंचा दिया जाए कि उसकी आने वाली कई -कई पीढियां भी कभी भारत के बारे में बुरा सोचने तक की हिम्मत न कर सके...