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पाकिस्तान को हथियार मुक्त करने का समय

             यह समय की मांग है कि अब पाकिस्तान को हथियारों से मुक्त देश बनाकर छोड़ा जाए.    पाकिस्तान सरकार द्वारा पोषित आतंकवाद के विरुद्ध जब भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान की धरती को अपने पराक्रम से हिला दिया *  तो पाकिस्तान घुटनों पर आ गया. पाकिस्तान के गिडगिडाने पर भारत ने क्षणिक रूप से युद्ध विराम तो स्वीकार कर लिया, परन्तु इस युद्ध विराम के बाद पाकिस्तान में जो कुछ हुआ उसे देखकर तो यही लगता है कि पाकिस्तानी सेना और उसकी कठपुतली सरकार, कुत्ते की दुम की भातीं है, जिसे सीधा नहीं किया जा सकता. युद्ध विराम की घोषणा के बाद पाकिस्तानी सेना और उसकी सरकार ने जश्न मनाया. सीज फायर की घोषणा को पाकिस्तान अपनी जीत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है. आखिर ये कैसे लोग हैं, जो जान की भीख मिलने को अपनी जीत बता कर उत्सव मना रहे हैं. युद्ध विराम के बाद उत्सव मनाना, यह प्रदर्शित करता है कि उनके मन में "मोहम्मद गोरी" की भांति ही विचार चल रहा है, कि इस बार हारने के बाद कम से जान तो बची; अब आगे फिर मजबूत होकर भारत पर कब्जा करने के अपने एजेंडे पर आगे बढें...

"पाकिस्तान और मोहम्मद गोरी" के कृत्यों में समानता। भारत को सुअवसर खोना नहीं चाहिये

............भारत विभाजन के बाद से ही हम पाकिस्तान के लगभग हर वार का मात्र तात्कालिक जवाब देकर उसे हर बार छोड़ दिया करते हैं; लेकिन वह अपनी हरकतों पर विराम लगाने को तैयार नहीं है. यह वैसा ही है जैसा मोहम्मद गोरी लगातार पृथ्वीराज चौहान पर हमले करता रहता था, और हर बार पृथ्वीराज चौहान उसे भाग जाने देते थे. परन्तु इसका अंत में क्या परिणाम हुआ यह सभी को पता है.  यदि पृथ्वीराज चौहान, मोहम्मद गोरी के दूसरे हमले पर ही उसका अंत कर दिए होते तो भारत का इतिहास कुछ और ही होता. इसलिए यदि पाकिस्तान को अभी नहीं रोक दिया गया तो भविष्य में भारत को भी पृथ्वीराज जैसा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है; क्योंकि पाकिस्तान मो0 गोरी की भांति भारत पर निरंतर हमले जारी रख रहा है ......

"ऑपरेशन सिन्दूर" की सफलता हेतु मोदी जी और भारत की सुरक्षा में लगे हुए सभी राष्ट्रभक्तों को धन्यवाद

...आज की सैन्य कार्यवाही से भारत ने पाकिस्तान की रक्षा मजबूती का आकलन तो कर ही लिया, परन्तु भारत को इतिहास से सबक लेते हुए यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे शत्रु को बार – बार हरा कर छोड़ देना उचित नहीं होगा; जैसा कि पृथ्वी राज चौहान ने मोहम्मद गोरी के साथ किया था. इसकारण पाकिस्तान को इस हालत में पहुंचा दिया जाए कि उसकी आने वाली कई -कई पीढियां भी कभी भारत के बारे में बुरा सोचने तक की हिम्मत न कर सके...  

फारुख अब्दुल्ला द्वारा 'मानवता' शब्द का अपनी सुविधानुसार प्रयोग

".....‘फारुख अब्दुल्ला’ ने काश अपने पाकिस्तानी साथियों को तब भी ‘मानवता के धर्म’ के पालन की सलाह दी होती, जब पाकिस्तानी सरकार अपने देश में पिछले कई दशकों से बसे हुए ‘अफगानों’ को वापस उनके मूल देश अफगानिस्तान भेज रही थी ...."

महबूबा मुफ़्ती का 'हमास' प्रेम

                                                    “महबूबा मुफ़्ती” ने ‘अमेरिका’ के ‘लास एन्जलेस’ में, जंगल की आग से हो रहे बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान के बहाने, गाजा का मुद्दा उठाया है. “महबूबा मुफ़्ती” के मुताबिक़ ‘गाजा’ में, ‘इजराइल’ की ओर से की जा रही सैन्य कार्यवाही से हो रहे जान माल के नुकसान के पीछे ‘इजराइल’ दोषी है. खैर “महबूबा मुफ़्ती” जैसे लोगों से इसी प्रकार के बयानों की अपेक्षा है. वे भारत के अधिकतर लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में कभी कोई चूक नहीं करती हैं. उनके ईमानदारी की दाद देनी पड़ेगी, कि वे कभी भी लोगों के बीच भ्रम उत्पन्न करने की कोई गलती नहीं करतीं; जिससे कि लोग किसी क्षण यह महसूस करने लग जायें कि “महबूबा मुफ़्ती” में कोई आत्म परिवर्तन होने लगा है.   “महबूबा” ने कभी भी ‘हमास’ को यह सुझाव देने की जहमत नहीं उठाई, कि वह ‘इजराइल’ के ‘बंधक नागरिकों’ को अपने चंगुल से छोड़ दे; जिससे इजराइल द्वारा की जाने वाली सैन्य कार्यवाही को रोकने का को...

वर्ष 2024 के अमेरिकी चुनाव की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के सन्देश

        कुछ समय पूर्व ही अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव संपन्न हुए. जो लोग इस चुनाव के परिणामों एवं चुनाव के दौरान होने वाली विभिन्न घटनाओं को लेकर जिज्ञासु थे, उनके लिए यह चुनाव बड़ा दिलचस्प रहा. जिन्हें इस बार के चुनाव में दिलचस्पी रही, उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के दौरान हुई विभिन्न घटनाओं का अपने – अपने नजरिये से विश्लेषण किया और उसी के अनुरूप निष्कर्ष भी निकाले.   इस चुनाव के अंतिम परिणाम के प्रति मेरे अंदर भी बड़ा उत्साह था. बहुत से लोगों की भाँति मैं यही चाहता था, कि अमेरिका के अगले राष्ट्रपति "डोनाल्ड" ट्रंप ही बनें. और अंततः वे ही अमेरिका के नए राष्ट्रपति के रूप में चुने गए. इस चुनाव के दौरान घटित कुछ घटनाओं ने मुझे बड़ा प्रभावित किया. उनमें से जिन घटनाओं ने मुझे प्रभावित किया, उनमें से प्रमुख घटनाओं का मैं यहाँ उनका जिक्र कर रहा हूँ. कुछ वर्षों पूर्व तक, मैं इस पूर्वाग्रह से ग्रसित था कि “हमारे भारतीय नेताओं एवं यहाँ के सामान्य जन मानस” का चुनावी दृष्टिकोण बड़ा ही सीमित होता है, जबकि विकसित देशों के लोग बड़ा विशाल और उदार दृष्टिकोण रखते हैं. वे अपने ...

"डोनाल्ड ट्रंप" की हत्या का प्रयास।। कोई साजिश या संयोग ?

नवम्बर – दिसम्बर 2023 में, अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों ने “निखिल गुप्ता” नाम के एक भारतीय नागरिक को इस आरोप में गिरफ्तार कर लिया, कि वह कनाडा में रह रहे खालिस्तानी अलगाववादी नेता `पन्नू’ की ह्त्या की शाजिश रच रहा है. वह भारतीय नागरिक, न तो उनके देश अमेरिका में था, और न ही उस व्यक्ति से अमेरिका के किसी भी नागरिक को खतरा था; फिर भी उसे `पन्नू’ जैसे अलगाववादी व्यक्ति की हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. `पन्नू’ की कथित रूप से हत्या की साजिश रचने वाला भारतीय नागरिक एवं `पन्नू’ दोनों उनके देश के बाहर थे और दोनों उनके नागरिक भी नहीं हैं.                                                      अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति `डोनाल्ड ट्रंप’ के ऊपर हुए जानलेवा हमले के प्रकरण में , अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का जैसा आचरण दिखाई दिया, उससे तो ऐसा ही प्रतीत होता है, कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को अन्य देशों से जुडी बहुत सारी साजिशों की जानकारी करने में त...